સંકલ્પ વિના એ શક્ય નથી
તું રોક નયનના આંસુ મથી
તું હાથની મુઠ્ઠી વાળી જો
રેખાઓ બધી બદલાઈ જશે !
--------- શેખાદમ આબુવાલા
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Saturday, February 27, 2010
पिया संग खेलब होरी
सखि ऊ दिन अब कब अइहैं,
पिया संग खेलब होरी ।
बिसरत नाहिं सखी मन बसिया
केसर घोरि कमोरी ।
हेरि हिये मारी पिचकारी
मली कपोलन रोरी ।
पीत मुख अरुन भयो री -
पिया संग खेलब होरी ।
अलक लाल भइ पलक लाल भइ
तन-मन लाल भयो री ।
चुनरी सेज सबै अरु नारी
लाल ही लाल छयौ री ।
आन कोउ रंग न रह्यौ री -
पिया संग खेलब होरी ।
भ्रमित भई तब भरि अँकवरिया
धरि अँगुरिन की पोरी ।
पंकिल गुन-गुन गावन लागे
प्रेम सुधा-रस बोरी ।
अचल सुख उदय भयो री -
पिया संग खेलब होरी ।
----------------प्रेम नारायण ’पंकिल’
पिया संग खेलब होरी ।
बिसरत नाहिं सखी मन बसिया
केसर घोरि कमोरी ।
हेरि हिये मारी पिचकारी
मली कपोलन रोरी ।
पीत मुख अरुन भयो री -
पिया संग खेलब होरी ।
अलक लाल भइ पलक लाल भइ
तन-मन लाल भयो री ।
चुनरी सेज सबै अरु नारी
लाल ही लाल छयौ री ।
आन कोउ रंग न रह्यौ री -
पिया संग खेलब होरी ।
भ्रमित भई तब भरि अँकवरिया
धरि अँगुरिन की पोरी ।
पंकिल गुन-गुन गावन लागे
प्रेम सुधा-रस बोरी ।
अचल सुख उदय भयो री -
पिया संग खेलब होरी ।
----------------प्रेम नारायण ’पंकिल’
इस होली पे
इस होली पे यदि तुम न आए
तो मैं तुमसे रूठ जाऊँगी
किया था जो सखियों से वादा
तुमको उनसे मिलवाऊँगी
कैसे वादा अपना निभा पाऊँगी
इस होली पे यदि तुम न आए
तो मैं तुमसे रूठ जाऊँगी
बना रही हूँ
जो अपने हाथों से
प्रेम रंग
फिर वो किसको लगाऊँगी
इस होली पे यदि तुम न आए
तो मैं तुमसे रूठ जाऊँगी
कैसे तुम्हारे बिना
पकवानों की मिठास चख पाऊँगी
इस होली पे यदि तुम न आए
तो मैं तुमसे रूठ जाऊँगी
मालूम है मुझे तुम
जेठ की छुट्टियों में आओगे
तुम ही बताओ
तब भला मैं कहाँ से
फूलों की बहार लाऊँगी
इस होली पे यदि तुम न आए
तो मैं तुमसे रूठ जाऊँगी
ना मैं तुम्हें
पीली सरसों का हाल बताऊँगी
न पाती भेज कर
गाँव की मिटटी सूँघाऊँगी
इस होली पे यदि तुम न आए
तो मैं तुमसे रूठ जाऊँगी
ना सोमवार को मन्दिर
तुम्हारे लिए जाऊँगी
न देख कर चाँद को मुस्कराऊँगी
इस होली पे यदि तुम न आए
तो मैं तुमसे रूठ जाऊँगी
बादल भइया से कह कर
सावन में तुमको तड़पाऊँगी
ना रिमझिम बरसातों में
मधुर गीत सुनाऊँगी
देख लेना इस होली पे
यदि तुम न आए
तो मैं तुमसे रूठ जाउंगी
------------------अंजु गर्ग
तो मैं तुमसे रूठ जाऊँगी
किया था जो सखियों से वादा
तुमको उनसे मिलवाऊँगी
कैसे वादा अपना निभा पाऊँगी
इस होली पे यदि तुम न आए
तो मैं तुमसे रूठ जाऊँगी
बना रही हूँ
जो अपने हाथों से
प्रेम रंग
फिर वो किसको लगाऊँगी
इस होली पे यदि तुम न आए
तो मैं तुमसे रूठ जाऊँगी
कैसे तुम्हारे बिना
पकवानों की मिठास चख पाऊँगी
इस होली पे यदि तुम न आए
तो मैं तुमसे रूठ जाऊँगी
मालूम है मुझे तुम
जेठ की छुट्टियों में आओगे
तुम ही बताओ
तब भला मैं कहाँ से
फूलों की बहार लाऊँगी
इस होली पे यदि तुम न आए
तो मैं तुमसे रूठ जाऊँगी
ना मैं तुम्हें
पीली सरसों का हाल बताऊँगी
न पाती भेज कर
गाँव की मिटटी सूँघाऊँगी
इस होली पे यदि तुम न आए
तो मैं तुमसे रूठ जाऊँगी
ना सोमवार को मन्दिर
तुम्हारे लिए जाऊँगी
न देख कर चाँद को मुस्कराऊँगी
इस होली पे यदि तुम न आए
तो मैं तुमसे रूठ जाऊँगी
बादल भइया से कह कर
सावन में तुमको तड़पाऊँगी
ना रिमझिम बरसातों में
मधुर गीत सुनाऊँगी
देख लेना इस होली पे
यदि तुम न आए
तो मैं तुमसे रूठ जाउंगी
------------------अंजु गर्ग
होली की व्यथा
होली की हुल्लड़बाजी है, पड़ोस का लड़का पाजी है
मन बहार जाने को व्याकुल है, पर दरवाजे पर अब्बा मांजी हैं
चारो तरफ उमंग है, होली का हुडदंग है
कहीं गुलाल कहीं रंग है, कहीं गुझिया कहीं भंग है
लड़का लड़की के संग है, लड़की के वस्त्र तंग हैं
वो देखो उसने उसको रंग लगाया
लड़की को ज़रा गुस्सा नहीं आया
वो लड़कियां कैसे चहचहा रही हैं
आज लड़कों के साथ नहा रही हैं
पर मुझे कहाँ आज़ादी है
दरवाजे पर अब्बा मांजी हैं
काश मैं भी वहां होती
पडोसी की पिचकारी से खुद को भिगोती
वो हाथ मेरा पकड़ता, गालों पे रंग रगड़ता
कहती क्या गज़ब ढाते हो, होली का फायदा उठाते हो
देखो अपनी हद में रहो, जो चाहते हो मुंह से कहो
पर वो कहाँ मानता, मेरे दिल की बात जानता
मुझे सीने से लगाता, और स्पर्श सुख मिल जाता
पर किस्मत में कहाँ ये बाज़ी है
दरवाजे पर अब्बा मांजी हैं
काश वो छत पे आ जाये, सितम आज वो ढा जाये
करें तमाशा हंसी ठिठोली, मिल कर खेले जी भर होली
साल में मौका यही मिले है, पर हाय रे सूनी जाय रे होली
मुझ पर ये पहरेबाजी है
दरवाजे पर अब्बा मांजी हैं
-------------------------अनिल कुमार
मन बहार जाने को व्याकुल है, पर दरवाजे पर अब्बा मांजी हैं
चारो तरफ उमंग है, होली का हुडदंग है
कहीं गुलाल कहीं रंग है, कहीं गुझिया कहीं भंग है
लड़का लड़की के संग है, लड़की के वस्त्र तंग हैं
वो देखो उसने उसको रंग लगाया
लड़की को ज़रा गुस्सा नहीं आया
वो लड़कियां कैसे चहचहा रही हैं
आज लड़कों के साथ नहा रही हैं
पर मुझे कहाँ आज़ादी है
दरवाजे पर अब्बा मांजी हैं
काश मैं भी वहां होती
पडोसी की पिचकारी से खुद को भिगोती
वो हाथ मेरा पकड़ता, गालों पे रंग रगड़ता
कहती क्या गज़ब ढाते हो, होली का फायदा उठाते हो
देखो अपनी हद में रहो, जो चाहते हो मुंह से कहो
पर वो कहाँ मानता, मेरे दिल की बात जानता
मुझे सीने से लगाता, और स्पर्श सुख मिल जाता
पर किस्मत में कहाँ ये बाज़ी है
दरवाजे पर अब्बा मांजी हैं
काश वो छत पे आ जाये, सितम आज वो ढा जाये
करें तमाशा हंसी ठिठोली, मिल कर खेले जी भर होली
साल में मौका यही मिले है, पर हाय रे सूनी जाय रे होली
मुझ पर ये पहरेबाजी है
दरवाजे पर अब्बा मांजी हैं
-------------------------अनिल कुमार
Wednesday, February 10, 2010
आ चांदनी भी मेरी तरह जाग रही है
आ चांदनी भी मेरी तरह जाग रही है
पलकों पे सितारों को लिये रात खड़ी है
ये बात कि सूरत के भले दिल के बुरे हों
अल्लाह करे झूठ हो बहुतों से सूनी है
वो माथे का मतला हो कि होंठों के दो मिसरे
बचपन की ग़ज़ल ही मेरी महबूब रही है
ग़ज़लों ने वहीं ज़ुल्फ़ों के फैला दिये साये
जिन राहों पे देखा है बहुत धूप कड़ी है
हम दिल्ली भी हो आये हैं लाहौर भी घूमे
ऐ यार मगर तेरी गली तेरी गली है
-------------------बशीर बद्र
पलकों पे सितारों को लिये रात खड़ी है
ये बात कि सूरत के भले दिल के बुरे हों
अल्लाह करे झूठ हो बहुतों से सूनी है
वो माथे का मतला हो कि होंठों के दो मिसरे
बचपन की ग़ज़ल ही मेरी महबूब रही है
ग़ज़लों ने वहीं ज़ुल्फ़ों के फैला दिये साये
जिन राहों पे देखा है बहुत धूप कड़ी है
हम दिल्ली भी हो आये हैं लाहौर भी घूमे
ऐ यार मगर तेरी गली तेरी गली है
-------------------बशीर बद्र
Monday, February 8, 2010
સજનવા
શબ્દને શોભે નહીં આ કાગઝી વસ્ત્રો સજનવા
આજથી પત્રોને બદલે લખજે નક્ષત્રો સજનવા
ખાલી હો તો પાછી તારી ઓઢણી લઈ લે સજનવા
ને હાથ સાથે હો તો કિંમત સો ગણી લઈ લે સજનવા
બે અમારા દૃ્ગ સજનવા, બે તમારા દૃગ સજનવા
વચ્ચેથી ગાયબ પછી બાકીનું આખુ જગ સજનવા
ક્યાં તો પીઝાનાં મિનારાને હવે પાડો સજનવા
નહીં તો મારી જેમ એને ઢળતા શિખવાડો સજનવા
સૂર્ય સામે એક આછું સ્મિત કર એવું સજનવા
થઈ પડે મુશ્કેલ એને ત્યાં ટકી રહેવુ સજનવા
આભને પળમાં બનાવી દે તું પારેવું સજનવા
થઈ જશે ભરપાઈ પૃથ્વીનું બધુ દેવું સજનવા
છે કશિશ કંઈ એવી આ કાયા કસુંબલમાં સજનવા
કે જાન સામેથી લુંટાવા ચાલી ચંબલમાં સજનવા
આજ કંઇ એવી કુશળતાથી રમો બાજી સજનવા
જીતનારા સંગ હારેલા યે હો રાજી સજનવા
ટેરવાં માગે છે તમને આટલું પૂછવા સજનવા
આંસુઓ સાથે અવાજો કઈ રીતે લૂછવા સજનવા
------------------ મુકુલ ચોક્સી
આજથી પત્રોને બદલે લખજે નક્ષત્રો સજનવા
ખાલી હો તો પાછી તારી ઓઢણી લઈ લે સજનવા
ને હાથ સાથે હો તો કિંમત સો ગણી લઈ લે સજનવા
બે અમારા દૃ્ગ સજનવા, બે તમારા દૃગ સજનવા
વચ્ચેથી ગાયબ પછી બાકીનું આખુ જગ સજનવા
ક્યાં તો પીઝાનાં મિનારાને હવે પાડો સજનવા
નહીં તો મારી જેમ એને ઢળતા શિખવાડો સજનવા
સૂર્ય સામે એક આછું સ્મિત કર એવું સજનવા
થઈ પડે મુશ્કેલ એને ત્યાં ટકી રહેવુ સજનવા
આભને પળમાં બનાવી દે તું પારેવું સજનવા
થઈ જશે ભરપાઈ પૃથ્વીનું બધુ દેવું સજનવા
છે કશિશ કંઈ એવી આ કાયા કસુંબલમાં સજનવા
કે જાન સામેથી લુંટાવા ચાલી ચંબલમાં સજનવા
આજ કંઇ એવી કુશળતાથી રમો બાજી સજનવા
જીતનારા સંગ હારેલા યે હો રાજી સજનવા
ટેરવાં માગે છે તમને આટલું પૂછવા સજનવા
આંસુઓ સાથે અવાજો કઈ રીતે લૂછવા સજનવા
------------------ મુકુલ ચોક્સી
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